पिता पर एक खूबसूरत …

पिता पर एक खूबसूरत कविता

पिता एक उम्मीद है, एक आस है,
परिवार की हिम्मत और विश्वास है।

बाहर से सख्त अंदर से नर्म है,
उसके दिल पे दफ़न कई मर्म हैं।

पिता संघर्ष की आंधियों में हौसलों की दिवार है
परेशानियों से लड़ने को दो धारी तलवार है।

बचपन में खुश करने वाला खिलौना है
नींद लगे तो पेट पर सुलाने वाला बिछौना है।

पिता जिम्मेदारियों से लदी गाड़ी का सारथी है
सबको बराबर का हक़ दिलाता एक महारथी है।

सपनों को पूरा करने में लगने वाली जान है
इसी से तो माॅं और बच्चों की पहचान है।

पिता ज़मीर है, पिता जागीर है,
जिसके पास ये है वो सबसे अमीर है।

कहने को तो सब ऊपर वाला देता है
पर खुदा का ही एक रुप पिता का शरीर है

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