Shrabi

जब जीते थे तब हस्ते थे
अब हर रोज मरते हैं तो पीते है

एक उम्र गुजारी थी उसकी जुल्फों की छाव में
अब तो उम्र गुजरती है शराब में

कह लेने दो लोगो को शराबी हमे
क्या फर्क पड़ता हैं जिंदा लाशों को

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