जिस्म जलता रहा जैसे …

जिस्म जलता रहा जैसे खुशबू जले,
साॅंस होठों पे आ के सुलगते रहे…!

न जली मैं, न बुझी मैं….
मेरे होठों पे सावन बरसते रहे…!!

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