बिना उसके दीदार के, …

बिना उसके दीदार के,
कैसे मैं आज ईद समझ लु..
बिना उसके इक़रार के,
कैसे में इज़हार पूरा समझ लु..

हर इबादत में है सिर्फ नाम उसका,

बिना उसके चेहरे पे हँसी देखें ,
कैसे दुआ कबूल समझ लु।

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