मै अपना इंसानियत #धर…

मै अपना इंसानियत #धर्म निभाउँगा,
यकीन मानो #भगवा पहन कर #मस्जिद भी जाऊंगा,
किसी रोज़ #फूलों की चादर #माँ_भवानी पड़ चढ़ाऊंगा,
मै एक नया #धर्म बनाउगा,
कभी #राम कभी #रहमान कहाऊंगा,
किसी रोज़ मस्जिद में #जल चढ़ाने जाऊंगा
मै एक #नया धर्म बनाऊंगा

हां जानता हूं कुछ #मजहब के जानकार आयेंगे,
कभी #प्यार से,कभी #गुस्से से समझाएंगे,
मजहब से #छेड़छाड़ ना करने की बात बताएंगे,
मै फिर भी मस्जिद में #आरती, मंदिर में #आजान कर, आऊंगा,
मै अपना #इंसानियत धर्म निभाउँगा,
कुछ लोगों #मजहबी हो जायेगे,
मुझे #मार कर ही खुद को #सुकून दिलाएंगे,
पर फिर भी दोनों को #एक करने से मै #बाज नहीं आऊंगा,
एक छोटी सी #ख्वाहिश कुछ अपनों पास छोड़ जाऊंगा,
मेरे #तेरहवीं पे #मुस्लिमो को #पूरी_सब्ज़ी,

चालीसवे पे #हिन्दूओ को #खीर खिलाऊंगा

मै अपना इंसानियत धर्म निभाउँगा ।।

आरजेबनारसी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *