दरिया का सारा नशा उत…

दरिया का सारा नशा उतरता चला गया
मुझको डुबोया और मैं उभरता चला गया
वो पैरवी तो झूठ की करता चला गया
लेकिन बस उसका चेहरा उतरता चला गया
हर सांस उम्रभर किसी मरहम से कम न थी
मैं जैसे कोई जख्म था बढ़ता चला गया

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