मेरे वक़्त की ख्वाहि…

मेरे वक़्त की ख्वाहिश थी तू
मेरे आज की आज़माईश थी तू
वो जो गुम गया , वो छूटा नहीं
वो जो साथ है वो रूठा नहीं

ना तु साथ है
ना तु आज है
तु जुस्तजू तु फ़रियाद है

तु मेहक गया गुलाब सा
इस क़दर बे-हिसाब सा
ना तु दूर है
ना तु पास है
तु हर घड़ी सी नई अांस है

ना तू चीख्ती सी शोर है
ना तु टूटती सी डोर है
रवा करू मैं हर दफा
तु मखमली सी भूल है

सलामती की दुआ करूं
तेरा ये हक भी , अब अदा करू
मेरी आख़िरी सी भूल तु
भूले से भी “मैं” भूला नहीं

तु बता मुझे “मै क्या करूं”
क्या हर सुबह मै तुझे रवा करूं

ना तु साथ है
ना तु आज है
तु जुस्तजू तु फ़रियाद है

: Daraksha Zaheer

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