क्षण-भर की जिंदगी है…

क्षण-भर की जिंदगी है। अब गए तब गए।
क्या फिक्र करते हो घर की,परिवार की?
क्या फिक्र करते हो मित्रों की,प्रियजनों की?
एक ही बात की फिक्र करो कि तुम अपना
गीत गाकर जाओगे,
कि तुम अपना नृत्य नाचकर जाओगे,
कि तुम अपनी सुगंध बिखरा कर जाओगे,
कि मरते समय तुम्हें यह अपराध-भाव न लगेगा,
कि मैं अपनी जिंदगी अपने ढंग से न जी सका।
बस यही सिद्धि है।

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