जैसे ही सुबह की नीं…

जैसे ही
सुबह की नींद टूटे
आंख बिल्कुल मत खोलें।
इस वक्त चित्त बहुत संवेदनशील है!
ध्यान करें कि मैं साक्षी हूं.. कर्ता नहीं हूँ।
ऐसे भाव में डूबे हुए उठें
फिर जो भी काम करें पूरे होश मैं करें।
होश का अर्थ है.. सब बाहर हो रहा है,
आपका इससे कोई संबंध नहीं है।
अचानक एक दिन आप पाएंगे कि यह भाव
आपके जीवन को बदल कर रख देगा।
क्रोध, मोह, सुख-दुख सब आएंगे —
लेकिन आप डांवाडोल नहीं होओगे!
आपके भीतर सतत धारा बनी रहेगी कि
आप न कर्ता हैं और न भोक्ता
मात्र एक द्रष्टा हैं।
ओशो नमन

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