एहसास

सिक्कों की गिनती में
ख़र्च दिए एहसास उसने
नुख़ता कशी की बात
जब आई होटों पर
नोटों के सेज सजा दिया उसने
एहसासों का बोझ सहा ना गया
देखो ज़रा
दो कश लगा
धुएं में सारे लम्हें गवा दिए उसने

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