रामजतन मौर्यवंशी

थक गया मै #दर्द की अपनी अदाकारी करते—करते,
ऐ! #खुशी कभी तू भी अपना #किरदार निभा दे,
मेरे #जिस्मों_जाँ को फिर से #हँसा दे,
माना #जिन्दगी रुठ गयी है,

झुर्रियाँ चेहरे समटे हुई है,

पर तू तो कोई #चमत्कार दिखा दे!!

आरजेरघुवंशी

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