सुनो दोस्त, तुम …

सुनो दोस्त,

तुम मुझे इग्नोर करो या न करो बात करो या न करो मुझे देखो या ना देखो मुझसे इश्क करो या ना करो मुझे समझो या न समझो मेरा रिप्लाई दो या न दो मेरे स्टेटस देखो या न देखो मेरे ऑनलाइन न आने पर मेरा हाल पूछो या न पूछो,

पर सुनो दोस्त,

जब तुम्हें मेरी जरूरत हो जब तुम दिल से मुझे कभी याद करो या तुम्हे जब लगे कि उदास हो तुम खामोश हो तुम,
बस कह देना तुम्हें मेरे साथ की जरूरत है,
झूठ सही पर कहना जरूर..
क्योंकि डूबते को तिनके का सहारा चाहिए..
थोड़ा जो तुम सम्भल जाओ तुम वापस से बदल जाना…
फिर तुम्हे हक है दोस्त,

मुझे जब चाहे छोड़ जाना…..

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