गीत कोई कसमसाता

नील नभ के पार कोई, मंद स्वर में गुनगुनाता,
रूह की गहराइयों में, गीत कोई कसमसाता!

निर्झरों सा कब बहेगा, संग ख़ुशबू के उड़ेगा,
जंगलों का मौन नीरव, बारिशों की धुन भरेगा!

करवटें ले शब्द जागे, आहटें सुन निकल भागे,
हार आखर का बना जो, बुने किसने राग तागे!

गूँजता है हर दिशा में, भोर निर्मल शुभ निशा में,
टेर देती धेनुओं में, झूमती पछुआ हवा में!

लौटते घर हंस गाते, धार दरिया के सुनाते,
पवन की सरगोशियाँ सुन, पात पादप सरसराते!

गीत है अमरावती का, घाघरा औ’ ताप्ती का,
कंठ कोकिल में छुपा है, प्रीत की इक रागिनी का!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *