दुनियां एक तालाब की …

दुनियां एक तालाब की जैसी ही है,

उसी तालाब में हँस मोती चुगता है
और बगुला मछली…
सिर्फ सोच- सोच का फर्क होता है…
आप दुनियां रूपी तालाब में क्या
चुनते हैं…?
ये आप पर ही निर्भर करता है।
आपकी सोच ही आपको बड़ा
बनाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *