ज़िंदगी फूलों की नही…

ज़िंदगी फूलों की नहीं,
फूलों की तरह महकी रहे –

जब कोई कहीं गुल खिलता है
आवाज़ नहीं आती लेकिन,
ख़ुशबू की ख़बर आ जाती है
ख़ुशबू, महकी रहे –

जब राह कहीं कोई मुड़ती है
मंज़िल का पता तो होता नहीं
इक राह पे राह मिल जाती है
राहें, मुड़ती रहें –

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