भगवान से भी भगवान …

?भगवान से भी भगवान का सत्संग बड़ा है?

भगवान से जो काम नहीं होता, वो भगवान के प्यारे संतों के सत्संग से ही होता है; भगवान से भी भगवान का सत्संग बड़ा है…

काली माता प्रकट हुई, रामकृष्ण के हाथों का भोजन करती है, उनके दिये हुए गजरे पहनती हैं, फिर भी काली ने कहा तोतापुरी गुरु से दीक्षा और सत्संग का आश्रय लो…

भगवान के दर्शन के बाद भी संतों के दर्शन और सत्संग की जरूरत रह जाती है…

कृष्ण साथ में हैं, रथ चला रहे हैं, फिर भी अर्जुन निर्दुख नहीं हुए;

जब भगवान ने कृपा करके गुरु का काम किया, और सत्संग दिया, तब अर्जुन का दुःख मिटा है…

तो जो काम भगवान से नहीं होता, वो भगवान के सत्संग से ही होता है, इसलिए सत्संग की महिमा बड़ी भारी है…

एक घड़ी, आधी घड़ी, आधी में पुनि आध,
तुलसी संगत साध की, हरे कोटि अपराध…

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