परिवार

अब परिवार कहाँ!

पहले होता था दादा का,
बेटों पोतों सहित,भरा पूरा परिवार,
एक ही छत के नीचे ।
एक ही चूल्हे पर,
पलता था उनके मध्य,
अगाध स्नेह और प्यार।

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