वाह री जिन्दगी

श्मशान के बाहर लिखा था!
मंजिल तो तेरी यही थी !
बस ज़िन्दगी गुजर गई आते-आते
क्या मिला तुझे इस दुनियां से
अपनों ने ही जला दिया जाते-जाते…

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