गृहस्थी

अपनी गृहस्थी को कुछ
इस तरह बचा लिया करो
कभी आँखें दिखा दी
कभी सर झुका लिया करो
असली नाराज़गी को लंबा
चलने ही ना दिया करो
‘वो’ ना भी हँसे तो
तुम मुसकुरा दिया करो
रूठ कर बैठे रहने से
घर भला कहाँ चलते हैं
कभी उन्होंने गुद गुदा दिया
कभी तुम मना लिया करो
खाने पीने पे विवाद
कभी होने ही न दिया करो
कभी गरम खा ली
कभी बासी से काम चला लिया करो
मिंया हो या बीवी
महत्व मे कोई भी कम नहीं
कभी खुद डाँन बन गये
तो कभी उन्हें बाँस बना लिया करो
अपनी गृहस्थी को कुछ
इस तरह “बचा” लिया करो..;)

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