तप्त हृदय को, सरस स्…

तप्त हृदय को, सरस स्नेह से,
जो सहला दे, मित्र वही है ।

रूखे मन को, सराबोर कर,
जो नहला दे, मित्र वही है ।

प्रिय वियोग, संतप्त चित्त को,
जो बहला दे, मित्र वही है ।

अश्रु बूँद की, एक झलक से,
जो दहला दे, मित्र वही है ।

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