उड़ा भी दो सारी रंजि…

उड़ा भी दो सारी रंजिशें
इन हवाओं में यारो”,
छोटी सी जिंदगी है
नफ़रत में ना गुज़र जाए I
मुहब्बत और दोस्ती में बहुत कशिश है यारों ,
इसकी महक
तमाम उम्र के बाद भी रहा करती है II

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