तुझे देख कर मैं हूँ …

तुझे देख कर मैं हूँ सोचता
तू हबीब है या रकीब है
यहाँ किसका चेहरा पढ़ा करूं
यहाँ कौन इतना करीब है

कोई दोस्त है न रकीब है
तेरा शहर कितना अजीब है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *