मुझ से ऊँचा तेरा क़द…

मुझ से ऊँचा तेरा क़द है, हद है
फिर भी सीने में हसद है, हद है!

मेरे तो लफ़्ज़ भी कौड़ी के नहीं
तेरा नुक़्ता भी सनद है, हद है!!

बेतहाशा हैं सितारे लेकिन
चाँद बस एक अदद है, हद है!

इश्क़ मेरी ही तमन्ना तो नहीं
तेरी नीयत भी तो बद है, हद है!

अश्क आँखों से ये कह कर निकला
ये तेरे ज़ब्त की हद है, हद है!!

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