संजय राज दिल्लगी शायरबाज

आपकी याद हमें न आयी हो,
ऐसा मेरा कोई शाम ही न था।
आप मेरे जिन्दगी में आ गये,
वरना मेरी जिन्दगी का कोई नाम ही न था।
आपको दो वक्त ना मिला मेरे साथ गुजारने का,
और हमे आपको हर वक्त याद करने के सिवा कोई काम ही न था।।

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