अपनी आँखों के समंदर …

अपनी आँखों के समंदर में उतर जाने दे
तेरा मुजरिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे

ऐ नए दोस्त मैं समझूँगा तुझे भी अपना
पहले माज़ी का कोई ज़ख़्म तो भर जाने दे

(माज़ी = भूतकाल, बीता हुआ समय)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *