किसी दिन सोचना खड़े …

किसी दिन सोचना खड़े होकर साहिल के किनारे पे..
कौन ज्यादा मजबूर है, वो किनारा जो चल नहीं सकता,
या कि वो लहर, जो रुक नहीं सकती…

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