मुझे सहल हो गयीं मंज…

मुझे सहल हो गयीं मंज़िलें,
वो हवा के रुख़ भी बदल गए।
तेरा हाथ हाथ में आ गया,
तो चिराग़ राह में जल गए ।

वो लजाए मेरे सवाल पर,
कि उठा सके ना झुका के सर।
उड़ी ज़ुल्फ़ चेहरे पे इस क़दर,
कि शबों के राज मचल गए ।

वही आसमाँ है वही ज़मीं,
वही अश्क़ हैं वही आसतीं,
दिल-ए-ज़ार तू ही बदल कहीं,
कि जहाँ के तौर बदल गए ।

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