काम अब कोई ना आयेगा,…

काम अब कोई ना आयेगा, बस इक दिल के सिवा
रास्ते ब॔द हैं सब, कूचा-ए-कातिल के सिवा

तेज मुंसिफ हो जहां, दर-ओ-रस्न हों शाहिद
बेगुनाह कौन है उस शहर में, कातिल के सिवा

[munsif = judge; darr-o-rasan = gallows and noose; shaahid = witness]

जाने किस रंग से आई है गुलशन में बहार
कोई नगमा ही नहीं शोर-ए-सिलासिल के सिवा

[shor-e-silaasil = loud noise of leg irons]

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