कहते हैं, हो जाता है…

कहते हैं, हो जाता है,
संगत का असर….

पर..

काँटों को आज तक नहीं आया
महक़ने का सलीक़ा….!!!

फिर खयाल आया

बेहतर हुआ जो न सीखीं काटों ने हुनर
वरना गुलाब का चुभना, बर्दाश्त न होता

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