ये सुर्ख लब, ये रुखस…

ये सुर्ख लब, ये रुखसार, और ये मदहोश नज़रें;

इतने कम फासलों पर तो, मयखाने भी नहीं होते!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *