माँ इतनी बड़ी हो गय…

“माँ” इतनी बड़ी हो गयीं लेकिन गिनती नहीं सीख पाई…
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आज भी अगर उनसे “एक” रोटी मांगता हूँ तो “दो” ही देती हैँ…

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