बड़ी हसरत से सर पटक प…

बड़ी हसरत से सर पटक पटक के गुजर गई कल शाम मेरे शहर से आंधी

वो पेड़ आज भी मुस्कुरा रहें हैं जिन्हें हुनर था थोड़ा झुक जाने का।।

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