कभी ना कहो की …

कभी ना कहो की
दिन अपने ख़राब है
समझ लो की हम
काँटों से घिर गए गुलाब है

रखो हौसला वो मंज़र भी आयेगा;
प्यासे के पास चलकर
समंदर भी आयेगा..!
थक कर ना बैठो, ऐ मंजिल के मुसाफ़िर;
मंजिल भी मिलेगी और
जीने का मजा भी आयेगा…!!

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