हवा आने दो चिराग़ों …

हवा आने दो चिराग़ों पे, उन्हें बचाओ नहीं
जले तो रोशनी , बुझे तो उन्हें फिर से जला

यही तो काम है इनका, ये जलना बुझना
हवाओं का क्या , वो तो आनी – जानी हैं

खुदा जहाँ में तेरे, ग़म की हवाएँ हैं बहुत
दिल-ए- चिराग़ ज़रा, कम ही रह गये क्यों है

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