न माँझी, न रहबर, न ह…

न माँझी, न रहबर, न हक में हवाएं….
है कश्ती भी जर्जर, ये कैसा सफर है…!
अलग ही मजा है फ़कीरी का अपना……
न पाने की चिंता न खोने का डर है…..!!

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