आज ना ही आओ मिलने, य…

आज ना ही आओ मिलने, ये मुलाकात रहने दो,
कुछ देर को मुझको, आज मेरे साथ ही रहने दो।

अंधेरों की, उजालों की, हवाओं की, चिरागों की,
या अपनी ही कोई बात छेड़ो, मेरी बात रहने दो।

मैं सोया की नहीं सोया, में रोया की नहीं रोया,
और भी काम हैं तुमको, ये तहकीकात रहने दो।

यूँ तो सैकड़ों रात जागा हूँ, तुम्हारे ही ख्यालों में,
पर सोना चाहता हूँ अब, आज की रात रहने दो।

जाते जाते ‘अक्स मेरा इक मशविरा है तुमको,
की इश्क़ करो तो बेहद, यूँ एहतियात रहने दो।

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