वो इश्क़ ही क्या, वो …

वो इश्क़ ही क्या, वो इबादत ही क्या
जिसमें सर उठाने का होश रहे …
हम तो डूबे रहे इबादत में उनकी,
कब फना हो गये पता ही न चला…

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