अज़ीब सी जिंदगी हो गई…

अज़ीब सी जिंदगी हो गई है।
ख़ुशी जाने कहा खो गई है।
अपनों के पीछे भागते भागते।
सपने भी नहीं आते।
आते हुए सपने क्यों दर्द दे के जाते हैं।
काश ऐसी हो जाए जिंदगी।
कोई पास आ के इतना तो कहे।
की हम टूटे हुए सपने जोड़ते है।
सुना आप का सपना टूट गया।
क्यों न मैं आपने अच्छे सपने आपको दे दू।
आप भी उनके जेसे ही हो जाओ।
खुद को खोने ने अच्छा है।
आप किसी के प्यार में खो जाओ।

बच्चे?

बिना अश्रुओं से रोना कितना तकलीफ देता है।
अच्छा होता आज भी हम बच्चे होते ।
रोने का सबब तो कोई न पूछता।
और लोग कहते बच्चा ही तो है।
जिद्द कर बैठा होगा।

जिंदगी

मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नही……
मैं वो किताब हूँ जिसमें शब्दों की जगह जज्बात लिखे है…..

इश्क

देखते है अब क्या मुकाम आता हैं साहेब।
सुखी पत्ती को इश्क हुआ है बहती हवा से।

इम्तहान

न तुम हमें समझ पाये।
न हम तुम्हे समझ पाये।
चलो अच्छा हुआ।
ये इम्तहानो का दौर खत्म हुआ।

always lonely

न मेरे सुख में कोई।
न मेरे दुःख में कोई।
न मेरे साथ कोई।
न मेरे राह में कोई।
अकेले ही चल दी।
जिंदगी तमाम हो गई।