_________*मुकद्दर*_________

न जाने कैसे वो मुकद्दर की किताब लिख देता हैं,
……..सांसें गिनती की,
और ख्वाहिशे…. “बेहिसाब” लिख
देता हैं………….

*******सुनो*******

कहते हो न,कि बहुत मिलेंगे तुम्हारे जैसे
तो सुनो..
नहीं ढूंढ पाओंगे हमारे जैसे।।

                    ......shraddha......