teri yaden

ऐसे कैसे छूट जाएगी ये आदत
आसान नहीं है,
जो है अब नसों में बह रही
हाँ, मुमकिन तो है कि भूला दूंगी मैं तूझे
पर एक उम्र गुजर जाएगी
फिर भी शायद तेरी यादें ना जाएगीं

दोस्त सून ना…

तू अजीब है
पर फिर भी तू मेरी दोस्त है
तेरी बातें भी बकवास हैं
हाँ, फिर भी तू मेरी दोस्त है
अच्छा सून…
तेरी हरकतें सच में अजीब हैं
पर क्या करूँ
तू मेरी दोस्त जो है
देख मैं कह रही हूं बदल जा
क्योंकि तू मेरी दोस्त है यार
सून ना…
बूरा मत मान यार
दोस्त तारीफें ही ऐसे करते हैं
बोलना…
आखिर मैं भी तो तेरी दोस्त हूँ ना?

कुछ ऐसा हो गया है कि…

कुछ ऐसा हो गया है कि तेरी बातें मुझसे अब ये रात भी करती है
जो छोड़ दिये थे अधूरे सपने इन आखों में तूने
तेरी कसम आज भी ये आखें तेरे सपनों को तड़पती हैं