आईना

उम्र भर गालिब यही भूल करता रहा…
धूल चेहरे पर थी ओर आईंना साफ करता रहा..

Believe in yourself

डाली पर बैठे हुए परिंदे को पता है कि डाली कमज़ोर है…

फिर भी वो उस डाली पर बैठता है क़्योकी उसको डाली से ज़यादा अपने पंख पर भरोसा है…

जिन खोजिया तिन पाहिय…

जिन खोजिया तिन पाहिया !
कोई कहंदा है “रब” गरीबां दा !
कोई कहंदा है “रब” अमीरां दा !
कोई कहंदा है “रब” बदनसीबां दा !
पर “तेरा” प्यार पा के !
मैनु एन्ज लगिया “वाहेगुरू” जी !
के “रब” साडे वरगे ख़ुशनसीबां दा

सतनाम वाहेगुरू जी

Zindagi

कभी हँसते हुए छोड़ देती है ये जिंदगी
कभी रोते हुए छोड़ देती है ये जिंदगी।

न पूर्ण विराम सुख में,
न पूर्ण विराम दुःख में,
बस जहाँ देखो वहाँ अल्पविराम छोड़ देती है ये जिंदगी।

प्यार की डोर सजाये रखो,
दिल को दिल से मिलाये रखो,
क्या लेकर जाना है साथ मे इस दुनिया से,
मीठे बोल और अच्छे व्यवहार से
रिश्तों को बनाए रखो