मैं तुझे फिर मिलूँगी…

मैं तुझे फिर मिलूँगी
कहा कैसे पता नही
मैं तुझे फिर मिलूँगी

में चाँद की शीतल छाया बन कर
तेरे मन की को शीतल करूँगी
तेरे जिस्म से निकल उस रूह को मिलाऊंगी
जिसमे मेरी सारी दुनिया हो

मैं तुझे फिर मिलूँगी
कहा कैसे पता नही
मैं तुझे फिर मिलूँगी