#मिजाज़ ऐ! #हिंदुस्त…

मिजाज़ ऐ! #हिंदुस्तान कितना आला है,,,

बुर्के में खाला और गोद में #नंदलाला है,,,

ना #कुरान का डर है ना #गीता का साया है,,,

माँ की ममता है मन बड़ा ही #मतवाला है।।।

मै अपना इंसानियत #धर…

मै अपना इंसानियत #धर्म निभाउँगा,
यकीन मानो #भगवा पहन कर #मस्जिद भी जाऊंगा,
किसी रोज़ #फूलों की चादर #माँ_भवानी पड़ चढ़ाऊंगा,
मै एक नया #धर्म बनाउगा,
कभी #राम कभी #रहमान कहाऊंगा,
किसी रोज़ मस्जिद में #जल चढ़ाने जाऊंगा
मै एक #नया धर्म बनाऊंगा

हां जानता हूं कुछ #मजहब के जानकार आयेंगे,
कभी #प्यार से,कभी #गुस्से से समझाएंगे,
मजहब से #छेड़छाड़ ना करने की बात बताएंगे,
मै फिर भी मस्जिद में #आरती, मंदिर में #आजान कर, आऊंगा,
मै अपना #इंसानियत धर्म निभाउँगा,
कुछ लोगों #मजहबी हो जायेगे,
मुझे #मार कर ही खुद को #सुकून दिलाएंगे,
पर फिर भी दोनों को #एक करने से मै #बाज नहीं आऊंगा,
एक छोटी सी #ख्वाहिश कुछ अपनों पास छोड़ जाऊंगा,
मेरे #तेरहवीं पे #मुस्लिमो को #पूरी_सब्ज़ी,

चालीसवे पे #हिन्दूओ को #खीर खिलाऊंगा

मै अपना इंसानियत धर्म निभाउँगा ।।

आरजेबनारसी

जिंदगी की रफ्तार में…

जिंदगी की रफ्तार में
सब बिछड़ते चले गए
घरों पर मंजिल दर मंजिल
बनते चले गए
अब तो ये मंजिल
चढ़ने का हौंसला भी
न रहा बाकी
बेहतर था
मैं जो जमीं पर था

लाश.. हाथों की लकीरे…

लाश..
हाथों की लकीरें क्या कहती है?
कुछ है या यू ही बेवजह सी है?
अगर कुछ है तो क्या?
अगर कुछ नहीं तो क्यों नहीं?
जब भी दिल को लगता कि अब ज़िन्दगी की गाड़ी पटरी पर है,
तभी कोई अपना सा ठोंकर मार गिरा देता है l
आस पास के सारे लोग हॅसते है मुझे पर, ठहाके मार !!
मैं भी हॅस देती हूँ, क्योंकि मेरे रोने से इन्हे और हसीं आएगी l
जी चाहता है, इन लकीरों को मिटा दूँ l
मन करता है, दिल खोलकर रो लूँ l
पर कर नहीं पाती कुछ भी….
आस धीरे धीरे मेरे अंदर मर रही है l
कही अब रोशनी नहीं देख पा रही हूँ l
खुद को किसी मकड़ी के जाल मे देखती हूँ l
ये जाल मेरे अपनों ने बुने है और ये सब दरवाजे मेरे ही लोगों ने बंद किये है l
अब हाथों से कलम भी छूट रही है,
अब कागज़ का एक ही टुकड़ा बच पाया है,
अब खुद को लाश बनाने की तैयारी है,
अब ज़ुबा पर ताला लगाने की बारी है l

मेरे कदम कैसे डगमगा …

मेरे कदम कैसे डगमगा सकते हैं,
मुझे चलना…
जो मेरे पापा ने सिखाया है…!!
जिन्दगी #खुशियों की महफिल नही,

सुख व #दु:ख का साथी है।।

आर.जे.रघुवंशी