जख्म

जख्म तू दिला दे,
ख़ुशी तो मैं खुद पा लूंगा,
तू एक बार मुस्करा दे,
मरहम मैं खुद लगा लूंगा।

धरती बचाए

सूनी है सड़के हैं सुनसान रहे,
नहीं है कोई भी जो शोर मचाए।
इंसान है जो वो घरो मै चुपा है,
प्राकृतिक दंड अब उनको मिला है।

है पक्षी का जीवन खुशहाल सारा,
शुद्ध हो गया है ये आकाश तुम्हारा ।
पशु भी हुए अब तो खुश इस जीवन से,
नहीं आरहा कोई जंगल का विध्वंश करने।।

हंसता है चंदा और हंसता है मंगल,
जो रचते थे रहने के सपने वहां पर।
वो मुंह को छुपाए अंधेरे में बैठा,
अपने जीवन के वो पुण्य को गिनता।

है बादल भी अब तो खूब बरसता ,
सूरज भी अब खूब है तपता।
सभी चाहते बस इंसान सुधरे,
किसी भी तरह धरती की अहमियत को समझें।

खुद भी रहे और सबको बचाए,
शुद्ध आकाश को ना काला बनाए।
ना जंगल को काटे ना नदियों को कूड़ा बनाए,
खुद भी बचे और धरती बचाए।।

                     @shutosh....

Tum

Tum Mere kya Ho,Mei Nahi Janta ,
Ek Diya ,Tel ke Bina Jal Nahi Sakta ,
Ek Kamal ,Pani ke Bina Khil Nahi Sakta ,
Ek Mei ,Tumhare Bina Chal Nahi Sakta.

My Creation.

Read it , till my words come to a rest . I don’t have enough time to write about it as The Reaper is chasing me like an unsatisfied greedy harlot.

O heavenly fountain
filled to the brim with indigo ink
bless thy child
to bleed quaintly on this
caucasian battlefield.

Provide me strength to dance
a little longer among these
roaring vowels and hymning consonants.

O dead wisdom of Earth
enrich me with the pagan tales
buried deep within thy heart.

O hailing winds
sing me shrieks and screams
of blacks and Jews , humans and
humans.

O ye sour mead
pour me all your excitement
and silence and
row this letter to the shore
where two seas greet.

O ye with Halo ,
What you staring at?
I understand your concern.
My creation would be better than yours.

By : Akai.

पहचान छोड़कर जाओ

पहचान छोड़कर जाओ

जीवन के प्रति मन में इतनी हताशा ना लाओ
सुख दुख से भरा ये खेल तमाशा देखते जाओ

किसी उलझन में हो तो एकान्त को अपनाओ
भूलो अपने तन को आत्म स्मृति में खो जाओ

अपने मन की बात पहले खुद को ही बताओ
प्रश्न पूछो खुद से ही और खुद से उत्तर पाओ

अनमोल तुम्हारा ये जीवन करो जरा पहचान
खत्म करो ना यूं ही इसको होकर तुम नादान

बिना चुनौती के बोलो जीवन में क्या आनन्द
हिम्मत रखकर उठ जाओ डरना कर दो बन्द

ऐसे ना बैठो होकर हताश, उदास और निराश
कुछ करके दिखलाने का अवसर करो तलाश

हिम्मत कभी ना हारो करो मुकाबला डटकर
ऐसा कर दिखलाओ जो हो दुनिया से हटकर

अपना लक्ष्य पाने के लिए पूरा ही जुट जाओ
लक्ष्य प्राप्त करने में ही सम्पूर्ण शक्ति लगाओ

अनुसरण करने लायक अपना जीवन बनाओ
विश्व पटल पर अपनी पहचान छोड़कर जाओ

ॐ शांति

loved

तेरी खुशी से बढ़ कर नहीं हो सकता है मेरा ग़म
तुझे मिले हर ख़ुशी न मिले कभी कोई गम।
अगर तेरी खुशी कोई और है तो
तेरी खुशी के लिए तुझे भी भुला सकतें हैं हमं।

AYE ZINDEGI

zindegi kush hal hai
phir bhi sab behal hai
khamosiyan bhari hai har jagah
iss liye har jagah akal hai .

koei nhi samajhta hai iss ko
do pal ki hi hai
na jàne kab dub jae jiwan ki naya
pachtane ko bhi wakth nhi hai

suno doston ab se sambhal jao
thoda socho aur iss waktah ko ji jao
na jane kb milegi esi kushi
thoda ruko aur apni dil ki baat keh jao