सर्वहारा

हे सृष्टि के रचयिता, ना झपक पलक एकटक निहार।
शून्य हैं कर कर्ण क्यों, ना अनसुनी कर सुन गुहार।
है वही जो ताज रचता, सृजता तु भी सरताज है।
कर्म है सम सृष्टि करना, चिंतित वही क्यों आज है।
ग्रीष्म में वो गीत गाता, शिशिर में भी गुनगुनाता।
जश्न में वो नृत्य करता है, दर्द में भी मुस्कराता।
फूल है वो बसंत का, पतझरों का पात है।
सर्दियों की धूप है ग्रीष्म का अवकाश है।
शिखर है वो पर्वतों का, गंभीरता पाताल है।
थाप है मृदंग की वो, संगीत का सुरताल है।
इस कोरोना काल में, भूख से चीत्कारता।
राह में पैदल चला था, है तुझे पुकारता।
ना कोई तरस खाता, ना कोई पुचकारता।
राह में सब ताड़ते थे, हर कोई दुत्कारता।
कौन है वो रहता कहाँ है, “राज़” ये अज्ञात है।
आज उसका बस ठिकाना, फुटपाथ है फुटपाथ है।

tum dur rho mujhse

mera astiva tumhare nam ka mohtaj nhi,
tum mere kal ke hissa the mere aaj ke nhi,
tumhare aane se ghul jati hai nafrat mujhme,
is halat ki jimedar main to nhi,bs ek baat nikalti hai mere hotho se tum dur rho mujhse,
kyoki mujhe bhi khabar hai is baat ki ye nafrat mujhe hi jalayegi,
meri khamosiya hi mujhe jaljala banayegi.
isiliye kahrahi hu dur rho mujhse

for someone

wo insaan tha kuch alag sa..
sayad hum usko samajh na sake….
wo her bat humara najar andaj karta tha…
isslia sayad hum usko kuch such bata na sake…?

Es duniya mein loog …

Es duniya mein loog
hairaan kyu hai

wo baat jaante hue bhi
anjaan kyu hai

Es insaaniyat ki duniya mein
loog haiwaan kyu hai

Wo khud ko badal sakte nhi
Doosron k liye pareshan kyu hai

pakke h unke lekin sooch kacche maqaan
wali hai
abhi kuch loog ki aqal chote baccho
waali hai

एक तरफा यारी में प्यार डूब सा गया

तेरे (लड़की) और से Hi है, मेरे और से Hi(लड़का) है…..
बाते शुरू हुई है,मेरे और से भी पूरा जोर है…..
दिन बीते!सालो भी,बाते भरपूर आज भी…..
मेरे और से प्यार है,उसकी और से यार हैं…..

थोड़ा दर्द शा हुआ, झगड़ा जब हुआ…..

रात में मनाकर सहारा देती थी,यार से बढ़कर रिश्ता है उसकी मौजूदगी वो खुद देती थी…..
एक दिन दिल मेरे और से यार से आगे बढ़ा,उसको अंदाजा भी ना पड़ा……
मेरे और से प्यार है,उसकी और से यार हैं…..

वो रात में मेरे साथ थी,वो दिन में मेरे साथ थी…..
वो रोने में साथ थी,वों हर जगह मेरी सांश थी…..
मुझे प्यार सा हुआ,पर मेरे पास वो ना हुआ…..
मेरे और से प्यार है,उसकी और से यार हैं…..

एक तरफा आगे रहा राहों में,पर उसका मुकाम पक्का रहा दिल की यारी में….

पूछा एक दिन “प्यार हैं ?”

उसने कहा नहीं तू सिर्फ यार हैं…..
बेबस हुआ,अकेला हुआ,लाचार भी…..
जब टूटा गुस्सा हुआ,और बर्बाद भी…..

उसने कहा ना में ऐसा तेरे बारे में सोचा,ना कभी सोचूं गी….
आगे तू प्यार में रहेगा,तो मेरे दिल में खो जाएगा…..
बस आजभी मेरे और से प्यार है,उसकी और से यार हैं…..

अश्क

तुम्हारे दिल की ज़मीं गर बंजर होने लगे तो बताना
बरसों से मेरे अश्क फिजूल ही बहा करते हैं।

आज फिर अतीत का कोई द…

आज फिर अतीत का कोई दिल पे दस्तक देने आया हैं

उसकी भी कुछ मजबूरियां थी ये बताने आया हैं

यहाँ तो मेरा साथ छोड़ चूका मेरा साया हैं

अब तो जीते जी मर चुके है हम

अब क्या मेरी लाश देखने आया हैं

dosti#love

dost nhi tum zindgi thi meri
jine, marne ki vajah thi tum meri
mohhabt ka kya kusur tha,diwangi thi tum meri

glti na teri thi na meri thi. . . .

bas ashiqui kr baithe tumse , yahi bandgi thi meri

मत कर इश्क की बात बन…

मत कर इश्क की बात बन्दे .
अकसर जिससे होता है उससे मुलाकात नही होती |
तड़पते रह जाते हैं सिर्फ यादो में उम्रभर ,
पर हकीकत में उससे बात नहीं होती |