Delhi ke halat

इतना लडा जमाने से वो डर गया होगा।।
क्या अब वो जिन्दा घर गया होगा।।।
मिलता था जो मुसाफिर अक्सर मुझे।।
क्या वो अब भी मुझसे मिलने मेरे घर गया होगा।।
क्या वो ये सब देखने के बाद वो बिखर गया होगा ।।

कुर्बानी का वक्त

नेता बनने की कुछ की ख्वाहिशें
जो बड़ी भीड़ के आगे चिल्ला रहे हैं
‘घरों से निकलो कि ये कुर्बानी का वक्त है’
और वो जो डिब्बों में भरा पेट्रोल दे गये हैं
इनका सियासी सांठ-गांठ अगर आप समझ लो;
अगर आप समझ लो कि ये जहरीली जुबान वाले
हाथों में माइक लिए जो हैं ‘सांपों के औलादे’ हैं
और वो जो मसीहे बन बैठे हैं धर्म की कुर्सियों पर
पानी नहीं, बेगुनाहों के खून पी पी कर जी रहे हैं
तो पाओगे,
ये जो देश जल रहा है
बेवजह जल रहा है|

भारत छोटा होता जा रहा है

कुछ समझ नहीं आ रहा 
कुछ अजीब तो जरूर हो रहा है 
मैं अभी जैसा हूं
उससे निश्चित ही बेहतर था पहले
और कुछ गर नहीं
सही को सही कहने की हिम्मत तो करता ही था
अब वो बात नहीं रहा मुझमें
वो रेपों वाली खबरें, जो रोज ही छपती है
पढ़कर उदास हो जाता हूं
गुस्से में रोज कोसता भी हूं किसी न किसी को
पर आज सुबह मेरी गली से
हाथों में मोमबत्ती लिए कुछ लोग गुजर रहे थे
मैंने दरवाजा बंद कर लिया
बस यूं ही, सोचा इससे मेरा क्या लेना देना
शायद मैं बढ़ती उम्र के साथ
छोटा होता जा रहा हूं
हां मैं कुछ अजीब तो होता ही जा रहा हूं
पर इतना भी अजीब नहीं
आखिरकार उन ‘कुछ लोगों’ के अलावा
बाकी का भारत मेरे जैसा ही तो है

my family

kabhi mujse door mat jana
mujhe pass bulana nhi ata
kabhi mujse rood mat jana
mujhe manana nhi ata
mai to tera hi hissa hoon
mujhe khud se door mat karna
mujhe akele jeena bhi nhi ata

Yaad

हमेशा किसी?को याद क्यों रखें,
जबकि लोग भूलना?पसंद करते हैं||

मेरे वक़्त की ख्वाहि…

मेरे वक़्त की ख्वाहिश थी तू
मेरे आज की आज़माईश थी तू
वो जो गुम गया , वो छूटा नहीं
वो जो साथ है वो रूठा नहीं

ना तु साथ है
ना तु आज है
तु जुस्तजू तु फ़रियाद है

तु मेहक गया गुलाब सा
इस क़दर बे-हिसाब सा
ना तु दूर है
ना तु पास है
तु हर घड़ी सी नई अांस है

ना तू चीख्ती सी शोर है
ना तु टूटती सी डोर है
रवा करू मैं हर दफा
तु मखमली सी भूल है

सलामती की दुआ करूं
तेरा ये हक भी , अब अदा करू
मेरी आख़िरी सी भूल तु
भूले से भी “मैं” भूला नहीं

तु बता मुझे “मै क्या करूं”
क्या हर सुबह मै तुझे रवा करूं

ना तु साथ है
ना तु आज है
तु जुस्तजू तु फ़रियाद है

: Daraksha Zaheer