शायर की शिकायत

तुम जुगनू की तरह आती हो
थोड़ी रोशनी दिखा कर गायब हो जाती हो
मुझे इंतजार की घड़ियों में फिर से डुबो जाती हो
यह तुम्हारा मुझ पर कोई कहर है
या मेरी समझ का फेर है
जो भी हो तुम्हारी अदाओं का सूरूर
अभी‌ भी‌‌ मेरे सर है।।