मन की बात

पसीने की स्याही से जो लिखते हैं इरादों को
उनके मुक़द्दर के सफ़ेद पन्ने कोरे नहीं होते।
ख्वाइश बस इतनी सी है कि लोग मेेरे लफ़्ज़ों को समझें ।
आरज़ू ये नहीं कि लोग वाह वाह करें ।।