सब मिट्टी था

और कुछ दिन यहाँ रुकने का बहाना मिलता..
इस नए शहर में कोई तो पुराना मिलता..
मैं जो कुछ भी था,जितना भी था, सब मिट्टी था..
तुम अगर ढूँढते मुझमें तो खजाना मिलता…

कहते-कहते

रोज पत्थर के हिमायत में ग़ज़ल कहते है….

वो सुनते नहि पर हम उन्हें महफ़िल कहते है..

जब इश्क़ करने की बात हम कहते है उनसे…

हम आज कहते है…

वो कल कहते है….

महादेव

इश्क़ मे डूब कर,कतरे से दरिया हो जाऊ…
में तुझसे शुरू होकर,मेरे महादेव
बस तुझमे ही खत्म हो जाऊ…

बाज़

अब भी इक उम्र पे जीने का न अंदाज़ आया ,
ज़िंदगी छोड़ दे पीछा मेरा मैं बाज़ आया ,

आजमा लो ज़रा

मेरी दिल कि बात सुन लो ज़रा,
साथी अपनी राहों का हमे चुन लो ज़रा,
प्यार करेंगे तुम्हें हर कदम के साथ,
यक़ीन नहीं है तो आजमा लो ज़रा!

ख़ुदा

सामने हे जो उसे लोग बुरा कहते हें,
जिस को देखा ही नहीं उस को ख़ुदा कहते हैं!

मगर जाने दे!

आपकी आँखों के समुंदर मे उतर जाने दे,
तेरा मुजरिम हू मुझे डूब कर मर जाने दे,
ज़ख्म कितना दिया हे तेरी चाहत ने मुझको,
सोचता हू तुझसे कहु मगर जाने दे!

वार

क्या करु ए ज़िन्दगी?कुछ कह नहि सकता!

अहसानो तले इस दुनिया के,मैं रह नहि सकता!

की तराशना तुझे है मेरे अंदर की मूरत को,

तु वार क़र,मत सोच की मैं सह नहि सकता!