किताबों के पन्नो को …

किताबों के पन्नो को पलट के सोचता हूँ,
यूँ पलट जाए मेरी ज़िंदगी तो क्या बात है।
ख्वाबों मे रोज मिलता है जो,
हक़ीकत में आए तो क्या बात है।
कुछ मतलब के लिए ढूँढते हैं मुझको,
बिन मतलब जो आए तो क्या बात है।???

harish